मंगल सौर मण्डल में सूर्य से बुद्ध, शुक्र तथा पृथ्वी के बाद चौथा ग्रह है। पृथ्वी से देखने पर इसकी आभा रक्तिम दिखाई देती है इसी वजह से इसे लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। मंगल की सूर्य से औसत दूरी लगभग 23 करोड़ कि॰मी॰ और कक्षीय
अवधि 687 (पृथ्वी) दिवस है। मंगल पर सौर दिवस एक पृथ्वी दिवस से मात्र
थोड़ा सा लंबा है : 24 घंटे, 39 मिनट और 35.244 सेकण्ड। एक मंगल वर्ष 1.8809 पृथ्वी वर्ष के बराबर या 1वर्ष, 320 दिन और 18.2 घंटे है। मंगल का अक्षीय झुकाव 25.19 डिग्री है, जो कि पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के बराबर है। परिणामस्वरूप, मंगल की ऋतुएँ पृथ्वी के जैसी है, हालांकि मंगल पर ये ऋतुएँ पृथ्वी पर से दोगुनी लम्बी है।
अन्य ग्रहों की भांति मंगल भी दीर्घवृत्ताकार कक्षा मे सूर्य की परिक्रमा करता है। इसी वजह से इसकी दूरी पृथ्वी से बदलती रहती है। इसके अलावा ग्रहों विशेषकर ब्रहस्पति का गुरुत्व खिंचाव भी इसके परिक्रमा मार्ग पर आंशिक असर डालता है। पृथ्वी से इसकी सबसे निकटतम दूरी 5.46 करोड़ किलोमीटर होती है जब कि अधिकतम दूरी 40 करोड़ किलोमीटर तक हो जाती है । वर्ष 2003 में मंगल ग्रह धरती
के बेहद करीब आया था। तब पृथ्वी से इसकी दूरी मात्र 5.57 करोड़ किलोमीटर दर्ज की गई थी। ऐसा दुर्लभ नज़ारा पिछली बार 60 हजार वर्ष पूर्व हुआ था। भविष्य मे ऐसी करीबी स्थिति वर्ष 2287 में बनेगी।
इस बार फिर, इस वर्ष 8 मई से लेकर 3 जून तक मंगल ग्रह पृथ्वी के काफ़ी
नजदीक से गुजरेगा। इस दौरान 30 मई को रात 9:36 पी एम पर यह पृथ्वी के सबसे
नजदीक होगा। इस समय पृथ्वी और मंगल के बीच दूरी महज़ 7.53 करोड़ किलोमीटर रह जाएगी। अगली बार यह नजारा 31 जुलाई, 2018 को दिखेगा।
|
| अयोध्या में मंगल ग्रह को देखते हुए डॉ आर. एस. कनौजिया, कामेश मणि पाठक, इनरमल, महेश, सुशील कुमार, पूनम तथा लावण्या (दाहिने से बायें) 30 मई, 2016, 9:40 पी एम |







